मेरी व्यथा

मेरे पास इसीलिए नही होते पैसे कि जब होते हैं तो खरचता हूँ ऐसे मानो आज ही हे जिंदगी जी ले इसे पूरे तरीके से -अनिरुद्ध शर्मा

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जीवन की नई प्राथमिकता

हमने आजकल अपने जीवन की प्राथमिकता पैसा कमाना बना लिया है. इस प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए हम हर को काम भी करने को तैयार हो जाते हैं जो इंसानियत के परे है और जिसे करने को हमारा अंतरमन इजाजत नहीं देता. इस पैसे की दोड़ में हम अपना घर,समाज और मानवीय कीमतें भूल … Continue reading जीवन की नई प्राथमिकता