माँ

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा देख लिया धरती पाताल अंबर सारा देख लिया स्वर्ग हे सिर्फ माँ के चरणों में ऊपर वाले का ये इशारा देख लिया

माँ बाप का सम्मान

बूढ़े माँ बाप का सम्मान करो क्यों रहते हो इन से लड़ते ये तो डोर ही है पतंग की जो उसे उडाती है वरना  हवा के झोंके कबके उसे ले उडते

परिवार को समर्पित

शुक्रिया कह डालते हैं जब हम करते हैं उनके लिए कुछ पर कोई ये तो पूछे के हमें इस लायक बनाया किसने -अनिरुद्ध शर्मा

माँ तुझे सलाम

माँ को लब्जों में जो पिरोने बैठा मैं लेके कलम हाथ में कलम भी टूट के बोली माँ को बयां करना नहीं है मेरी ओकात में -अनिरुद्ध शर्मा