जल्दबाजी

न जाने कैसी जल्दबाजी घुस आई है हर इंसान में कोई रहना ही नहीं चाहता मेरे हिंदुस्तान में हर तरफ जाम और गाड़ियों का शोर शराबा है मानो घुसाना चाहते हों दो तलवार एक मियान में कितना सिखा दूँ कितना समझा दूँ इन्हे तमीज बिकती नहीं यहाँ बाजारों दुकान में यूँ ही रेंगते रेंगते जीवन … Continue reading जल्दबाजी

जीवन का एक और सच

मैं प्रतिदिन घर से कार्यालय जाने के लिए भारतीय रेल का प्रयोग करता हूँ और उनके द्वारा बनाये एंड्रॉइड एप से यह जानता रहता हूँ की जिन जिन ट्रेनों में मैं जा सकता हूँ वे समय पर हैं या कोई विलम्ब से भी है। कई बार तो ऐसा होता है कि सारी ट्रेनें समय पर … Continue reading जीवन का एक और सच

असली दौलत

दूसरों के दिल मे जो अच्छाई हे यही मेरे जीवन की कमाई हे क्यों भागू मैं पैसे के पीछे इससे कहाँ कब खुशी आई हे -अनिरुद्ध शर्मा

मेरी व्यथा

मेरे पास इसीलिए नही होते पैसे कि जब होते हैं तो खरचता हूँ ऐसे मानो आज ही हे जिंदगी जी ले इसे पूरे तरीके से -अनिरुद्ध शर्मा

जीवन पर पंक्तियाँ

कुछ पंक्तियाँ जीवन के ऊपर. कुछ कमाने को घर से बाहर क्या गए हम असली कमाई घर ही छोड़ गए ये भाग दौड़ की भी है कैसी कमाई ना भूक ही लगी ना माँ खिलाने आई क्या कमाना था और क्या कमा रहे हैं इंसानियत छोड़ कागज के टिल्ले जमा रहे हैं एक साथ पैसे … Continue reading जीवन पर पंक्तियाँ

बच्चे और बूढ़े

बच्चे और बूढ़े में बड़ी समानता है एक को जीवन का पता नहीं और दूसरा जीवन को जानता है आज का नोजवान ही न जाने किस गुरूर में हैं जो ना बच्चे को बच्चा ,ना बड़े को बड़ा मानता है -अनिरुद्ध शर्मा