चरित्र का चोला

यूँ मेरे चोले को देख मेरी पहचान ना कर ये तो मैला ही रहता है मन अपना मैं साफ़ रखता हूँ यही तो इंसान का चरित्र कहता है -अनिरुद्ध शर्मा