ये कैसी जीत

आज इतने आगे निकल आये हम कि घर भी अनजाना लगता है माँ का आँचल पुराना लगता है पापा का साथ बचकाना लगता है अरे जरा बैठकर सोचना कि किस जीत की ख़ुशी मना रहा हूँ मैं ऐसी जीत से तो अच्छा हार जाना लगता है

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ये केंसी कमाई

वो कमाई भी हे क्या कमाई जब साथ ना हो तुम्हारी आई इसी बात की खुशी मैं मनाता हूँ शाम ढलते ही माँ के पास आ जाता हूँ माँ के आँचल की बराबरी पैसों में नही और उस कमाई की गिनती कैंसो में नही -अनिरूद्ध शर्मा