मेरी व्यथा

मेरे पास इसीलिए नही होते पैसे कि जब होते हैं तो खरचता हूँ ऐसे मानो आज ही हे जिंदगी जी ले इसे पूरे तरीके से -अनिरुद्ध शर्मा

कला का कदरदान चाहिए

ना तो उपहार चाहिये ना कोई अहसान चाहिये ना ही पैसा चाहिये ना कोई पहचान चाहिये शब्दों को पिरोकर माला बनाने वाला कवी हूँ मुझे बस कला का कदरदान चाहिए -अनिरुद्ध