पैसे के नशे में चूर हो कर

अभी समय के हाथ मजबूर हो करपैसे के नशे में चूर हो करजी रहें है ज़िन्दगीअपने माँ बाप से दूर हो कर           बच्चों के पास बाबा दादी नही          सीख की कहानी नही प्यार की गोदी नही          बैठे भी हैं बच्चे अकेले          खिलोने भरपूर हो करखुद बच्चों को समय दिया नहीदो बात प्यार से किया नहीदिया … Continue reading पैसे के नशे में चूर हो कर

माँ

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा देख लिया धरती पाताल अंबर सारा देख लिया स्वर्ग हे सिर्फ माँ के चरणों में ऊपर वाले का ये इशारा देख लिया

एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है

अपने मन की खुशी जिससे कोसो दूर है एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है                        बचपन था जब बहन की माँगे याद आई                       छोटे भाई की भलाई खातिर,पिताजी से डाँट बहुत खाई                      बचपन से ही चढा जिम्मेदारी का फितूर है                      एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है बड़ा हुआ … Continue reading एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है

बेटी ओर बहू

बेटी जो बहु बनी तो क्यों पराई हो गई भोली भाली बेटी भी ज़माने की सिखाई हो गई                      छोड़ आई जब वो बाबुल का घर पिया की खातिर                     फिर क्यों वो दहेज की सताई हो गई ससुराल का दस्तूर भी अजीब है बिटिया करे तो लड़कपन और बहु करे तो बुराई हो गई … Continue reading बेटी ओर बहू