सफलता की राह पहचानने के 5 आसान तरीके

आज हममें से हर कोई सफल होना चाहता है और हम यही निश्चय लिए हम सब सफलता की राह पर चल पड़ते हैं। पर कैसे पहचाने की राह सही पकड़ी है या गलत, या फिर यूँ कहिये की कहीं गलती से हम गलत राह पर तो नहीं है.

यह पहचानना बड़ा आसान हैं, नीचे कुछ बिंदु दिए है जिनसे हम अपनी राह का पता लगा सकते हैं।

चुनोतियाँ- चुनोतियाँ हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। हर चुनोती हमारे अंदर छुपे कौशल को निखारती है और हमें परेशानी से मुकाबला करना सिखाती है।हम जब भी अपनी सफलता की राह पर चलेंगे तो हमें चुनोतियाँ मिलेंगी ही।

अब यदि हम ऐसी राह चुनें जिसमे चुनोतियाँ नहीं मिले तो हमें सफलता भी नहि मिलेगी।सफल होने के लिए चुनोतियों का होना जरूरी है।तो ये मान लीजिये की अगर हमें अपने राह में कोई चुनोती नहीं मिल रही है तो यह निश्चित है की हम गलत राह पर सफ़र कर रहे है। यह हमारे सफलता की राह नहीं है। ऐसी स्थिति में अपने लक्ष्य को देखते हुए अपनी राह को पहचाने और बदलाव लायें।

आलोचनाएं- बहुत पुरानी कहावत है की अपना निंदक सदैव अपने साथ रखें।उस निंदक की ख़ास बात यह रहती है की वह बिना किसी प्रयास के हमारी सभी गलत आदतों को सही आदत में बदल देता है। आलोचना की भी हमारे जीवन में बहुत महत्ता है। वह आलोचना चाहे हमारा मित्र करे या समाज।

आलोचना कोई भी व्यक्ति दो ही सूरतों में करता है या तो वो हमारा शुभ चिंतक है जैसे कि हमारा मित्र,और दूसरा वो व्यक्ति जो हमारे लिए ईर्ष्या की भावना रखता है।दोनों ही हमें हमारी गलतियां बताते हैं पर गलती बताने के प्रकार में अंतर होता है. मित्र चाहता है की हम उसकी बात सुन कर अपनी गलतियों को सुधारें लेकिन एक इर्ष्या की भावना रखने वाला व्यक्ति चाहता है की हम उसकी बातें सुन कर हताश हो जाये और अपने सफ़र में आगे ना बढ़ें.  ऐसे हालात में यदि हमें लगता है की हम गलत हैं तो हमें बजाय उस व्यक्ति पर क्रोधित होने के उसकी बात सुन अपने आप को निखारना चाहिए । और यदि आलोचना करने वाला व्यक्ति हमारे प्रति ईर्ष्या का भाव रखता है तो यह इस बात का प्रमाण है की हम सही रस्ते पर चल रहे हैं।ईर्ष्या की भावना वही रखेगा जो उस राह पर चल ना पाया हो जिसपर हम चल रहे है और अपने लक्ष्य के तरफ अग्रसर है। यदि हमें अपने राह पर कहीं आलोचना नहीं मिल रही तो निश्चित ही हम गलत राह पर हैं और अपने लक्ष्य से समझोता कर रहे है। तो आलोचना से ना धबरते हुए उनका सामना कर अपना लक्ष्य प्राप्त करें।

संतुष्टि- हर व्यक्ति हर काम अपने मन की संतुष्टि के लिए करता है पर यह संतुष्टि क्षण भर की ही होनी चाहिए। अपनी राह पर एक लक्ष्य प्राप्त कर उस लक्ष्य पर ज्यादा समय तक संतुष्ट ना हों। यदि आप संतुष्ट हो जायेंगे तो आप अपने मन की क्षमताओं को और नहीं जान पाएंगे , आपका विकास रुक जायेगा। यदि आप अपने किसी भी कार्य या लक्ष्य से ज्यादा समय तक संतुष्ट है तो निश्चित ही आप गलत राह पर हैं और अपने लक्ष्य से ओझल हो चुके हैं।

आनंद- हमें काम वो करना चाहिए जिस कार्य को करने में आनंद आता हो । अपना लक्ष्य भी हमें ऐसे ही निर्धारित करना चाहिए की उस तक पहुचने की राह पर हम आनंद से चलें और सारे काम आनंद से ही करें। यदि हमें अपने लक्ष्य तक पहुचने के लिए किये जा रहे कार्य को करने में आनंद नहीं आ रहा तो निश्चित ही हम गलत राह पर है। बिना मन का किया गया कार्य या किसी दबाव में किया गया कार्य अभी हमें सफलता से नहीं मिला सकता। जब भी आपको ऐसा लगे की आपका कार्य में आनंद नहीं आ रहा तो आप दूसरी राह पकड़ सकते है और सफलता की और अग्रसर हो सकते हैं।

मूल- मनुष्य को कभी भी अपना मूल नहीं भूलना चाहिए। हमें अपना भूत और अपना वास्तविक स्थान पता होना चाहिए।सफलता की राह पर यदि हम अपने मूल को भूल जाते है तो हम कभी भी सफलता को नहीं प्राप्त कर सकते। तो सदैव सफलता की राह में अपने मूल को याद रखे।

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4 thoughts on “सफलता की राह पहचानने के 5 आसान तरीके

  1. My name is Vijay Patel Khargone -kacchipura -I am old is 22y my qualificatio- ITI electrician and welder and computer my hobbies song writing my favourite Goad -Maa Sherawali my think is very big success/ everything hosley Zindagi Mein jitne ke liye hoslo ki Zaroorat hoti hai aur hosley Zindagi Se milte hai Na ki Kisi Aur se aur inko Kabhi Nahi khona chahiye Jai Hind Jai Bharat Van Bachao Jeevan paav Indian. Thankyou

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